Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 13, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 13, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
इन्द्रायुधवदालोलनानारागमनोहरा ।
लोला तडिदिवोत्पन्नध्वंसिनी च जडाश्रया ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
यह श्री इन्द्रधनुष के समान चंचल (अचिरस्थायी) रंगों
से मनोहर एवं बिजली के समान चपल और उत्पन्न होते ही नष्ट होनेवाली है ओर प्रायः जड (मूर्ख) ही
इसके आश्रय हे