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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 13, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 13, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

हिमं वैराग्यवल्लीनां विकारोलूकयामिनी । राहुदंष्ट्रा विवेकेन्दोः सौजन्याम्भोजचन्द्रिका ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

वैराग्यरूपी लताओं के लिए तुषार है, काम आदि चित्तविकाररूपी उल्लुओं के लिए अंधेरी रात है, विवेकरूपी चन्द्रमा के लिए राहू की दाढ़ है और सौजन्यरूपी कमल के लिए चाँदनी है अर्थात्‌ जैसे तुषार से लताएँ सूख जाती हैं वैसे ही श्री प्राप्ति होने पर विवेक नष्ट हो जाता है एवं जैसे चाँदनी में कमल सिकुड़ जाते हैं खिलते नहीं वैसे ही सम्पत्ति प्राप्त होने पर सौजन्य का संकोच हो जाता है