Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 13, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 13, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
तावच्छीतमृदुस्पर्शाः परे स्वे च जने जनाः ।
वात्ययेव हिमं यावच्छ्रिया न परुषीकृताः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
तभी तक लोग अपने ओर पराये लोगों पर दया, दक्षिण्य, स्नेह आदि करते हैं, जब तक कि जैसे
वायु से बर्फ कड़ा हो जाता है, वैसे ही श्री द्वारा वे कठोर नहीं हो जाते। सम्पत्ति प्राप्त होते ही लोग अपने
ओर पराये जनों पर दया ओर स्नेह का भाव छोडकर कठोर बन जाते हैं, यह भाव हे