Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 14, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 14, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
विषयाशीविषासङ्गपरिजर्जरचेतसाम् ।
अप्रौढात्मविवेकानामायुरायासकारणम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
जिन लोगों के चित्त विषयरूपी सर्पो के
संसर्ग से सर्वथा जर्जर (शिथिल) है और जिनमें दृढ आत्मविवेक नहीं हे, उनकी आयु वृथा और
क्लेशकर ही है