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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 14, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 14, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

तरङ्गं प्रतिबिम्बेन्दुं तडित्पुञ्जं नभोम्बुजम् । ग्रहीतुमास्थां बध्नामि न त्वायुषि हतस्थितौ ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

तरंग को, जल आदि में प्रतिबिम्बित चन्द्रमा को, बिजली को और आकाशकमल को हाथ से पकड़ने का मुझे विश्वास है, पर अस्थिर आयु में मेरा विश्वास नहीं हे। तरंग, प्रतिबिम्बित चन्द्र आदि का ग्रहण असंभव है फिर भी उक्त असंभव बातें भले ही हो जायें, पर अस्थिर आयु में मेरा विश्वास नहीं होता यह भाव है