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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 15, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 15, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

निरहंकारवृत्तेर्मे मौर्ख्याच्छोकेन सीदतः । यत्किंचिदुचितं ब्रह्मंस्तदाख्यातुमिहार्हसि ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

हे ब्रह्मन्‌, में निरहंकार होकर भी मूर्खतावश शोक से दुःखी हो रहा हूँ इसलिए मेरी प्रार्थना है कि मेरे लिए जो विहित और हित हो, उसका मुझे उपदेश दीजिये