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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 16, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 16, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

कल्लोलकलितावर्तं मायामकरमालितम् । न निरोद्धुं समर्थोऽस्मि मनोमयमहार्णवम् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

भोगों की प्राप्ति के हेतुभूत उत्साहरूप कल्लोल से जिसने डूबने लायक आवर्तं बना रक्खे हैं, मायारूप (परवंचनारूप) मगरो से परिवेष्टित मनरूप महासमुद्र को अपने वश में करने के लिए मैं असमर्थ हूँ