Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 17, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 17, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
सर्वेषां जन्तुजातानां संसारव्यवहारिणाम् ।
परिप्रोतमनोमाला तृष्णा बन्धनरज्जुवत् ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे अनेक पशुओं के बाँधने के लिए गले में लगी हुई रस्सियों से ग्रथित मालासदृश तिरछी
विस्तृत रज्जु होती हे वैसे ही सांसारिक व्यवहार में फँसे हुए प्राणियों के समूहों में मनों को चारों ओर से
बाँधने के लिए यह तृष्णारूप रज्जु है