Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 18, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
कलेवरमहंकारगृहस्थस्य महागृहम् ।
लुठत्वभ्येतु वा स्थैर्यं किमनेन मुने मम ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
महामुने, अहंकाररूपी गृहस्थ का महान् गृह यह कलेवर चाहे भूमि में गिरकर बदल जाय, चाहे
चिरकाल तक स्थिर रहे, इससे मेरा क्या प्रयोजन ?