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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, Verse 53

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 18, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 53

संस्कृत श्लोक

नाहं देहस्य नो देहो मम नायमहं तथा । इति विश्रान्तचित्ता ये ते मुने पुरुषोत्तमाः ॥ ५३ ॥

हिन्दी अर्थ

न मैं देह का सम्बन्धी हूँ, न देह मैं हूँ, न मेरी देह है और न मैं ही देह हूँ, ऐसा विचारकर अर्थात्‌ इदंतासे विशिष्ट घट आदि के समान जड़ देह यह मैं नहीं हूँ, ऐसा विचार कर परमात्मा में जिनका चित्त विश्रान्त है, वे लोग ही पुरुषोत्तम हैं