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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 19, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

अजस्रवाष्पवदनः कर्दमाक्तो जडाशयः । वर्षोक्षितस्य तप्तस्य स्थलस्य सदृशः शिशुः ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

तपी हुई भूमि के ऊपर सदा भाप निकलती है, इधर उधर कीचड़ व्याप्त होता है ओर भीतर जल रहता है, वैसे ही बालक भी सदा आँसुओं से युक्त मुखवाला, कीचड़ से सना एवं मूढबुद्धि ओर अचेतन रहता हे