Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 19, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
रोषरोदनरौद्रासु दैन्यजर्जरितासु च ।
दशासु बन्धनं बाल्यमालानं करिणामिव ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
हाथियों के बन्धन-स्तम्भ के
समान बाल्यावस्था अकारण क्रोध ओर रोदन से भीषण ओर दीनता से जर्जरित दशाओं में बन्धन है
अर्थात् जैसे अकारण क्रोध, रोदन आदि से भीषण ओर दीनता से जर्जरित अवस्थाओं में हाथी का
बन्धनस्तम्भ (आलान) बन्धन होता हे, वैसे ही अकारण क्रोध, रोदन आदि से भीषण ओर दैन्य से
जर्जरित अवस्थाओं में प्राणियों का बाल्यकाल भी बन्धन ही है