Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 19, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
न मृतौ न जरारोगे न चापदि न यौवने ।
ताश्चिन्ताः परिकृन्तन्ति हृदयं शैशवेषु याः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसी पराधीनताप्रयुक्त चिन्ताएँ
बाल्यावस्था में जीव के हृदय को पीडित करती हैं, वैसी मरण में, बुढ़ापे में, रोगावस्था में, आपत्ति में
एवं योवनावस्था में नहीं करती