Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 19, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
तिर्यग्जातिसमारम्भः सर्वैरेवावधीरितः ।
लोलो बालसमाचारो मरणादपि दुःखदः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
बाल्यावस्था में पशुपक्षियों की-सी चेष्टाएँ होती हैं, सभी लोग
बालकों की भर्त्सना करते हैं, सचमुच चंचल बाल्यावस्था मरण से भी बढ़कर दुःखदायिनी है