Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 19, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
प्रतिबिम्बघनाज्ञानं नानासंकल्पपेलवम् ।
बाल्यमालूनसंशीर्णमनः कस्य सुखावहम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
सामने स्थित प्रतिबिम्ब के समान बाल्यावस्था में स्फुट ओर निविड अज्ञान रहता है अथवा प्रत्येक
क्षण में चित्त में तत् तत् विषयों का प्रतिबिम्ब पड़ने से अनेक प्रकार की भ्रान्तियाँ होती हैं, अतएव यह
नाना प्रकार के संकल्पों से तुच्छ है । तत्-तत् संकल्पित विषयों के न मिलने से बाल्यावस्था में मन
चारों ओर से कटा हुआ-सा और जीर्णशीर्ण-सा दुःखित रहता है, भला ऐसी बाल्यावस्था किसको
सुखप्रद होगी ?