Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 19, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
जलवह्नयनिलाजस्रजातभीत्या पदे पदे ।
यद्भयं शैशवेऽबुद्ध्या कस्यापदि हि तद्भवेत् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
बाल्यावस्था में अज्ञानवश जल, अग्नि और वायु से सदा उत्पन्न होनेवाले भय
से पद-पद में जैसा दुःख होता है, वैसा आपत्ति में भी किसीको न होगा अर्थात् बाल्यावस्था में आपत्ति
से भी बढ़कर दुःख होता है