Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 20, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 20, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
आपातमात्ररमणं सद्भावरहितान्तरम् ।
वेश्यास्त्रीसंगमप्रख्यं यौवनं मे न रोचते ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
यौवन केवल आपाततः जब तक विचार न किया जाय तभी तक रमणीय प्रतीत होता
है, इसमें शुद्धचित्तता का सर्वथा अभाव रहता है । यह वेश्या स्त्री के समागम के समान नीरस हे, इसलिए
मुझे अच्छा नहीं लगता