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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 20, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 20, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

सुविस्मृतशुभाचारं बुद्धिवैधुर्यदायिनम् । ददात्यतितरामेष भ्रमं यौवनसंभ्रमः ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

यह यौवनकालीन मोह शुभ आचरण को भुलानेवाली एवं बुद्धि को कुण्ठित करनेवाली (बुद्धिनाश करनेवाली) भ्रान्तिकी प्रचुरमात्रा में सृष्टि करता है