Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 20, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 20, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
शक्यते घनकल्लोला भीमा लङ्घयितुं नदी ।
न तु तारुण्यतरला तृष्णातरलितान्तरा ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
बड़ी-बड़ी लहरों से युक्त
भीषण नदी लाँघी जा सकती है, पर भोगतृष्णा से चंचल इन्द्रियोंवाली यौवन से अस्थिर चित्तवृत्ति वश
में नहीं की जा सकती है