Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 20, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 20, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
सा कान्ता तौ स्तनौ पीनौ ते विलासास्तदाननम् ।
तारुण्य इति चिन्ताभिर्याति जर्जरतां जनः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
वह मनोहारिणी कान्ता, उसके वे विशाल स्तन, वे मनोज्ञ हावभाव और
वह सुन्दर मुख युवावस्थामें ऐसी-ऐसी अनेक चिन्ताओं से मनुष्य शिथिल हो जाता है