Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 21, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 21, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
ज्वलतामतिदूरेऽपि सरसा अपि नीरसाः ।
स्त्रियो हि नरकाग्नीनामिन्धनं चारु दारुणम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
वासनाओं से पूर्णं होने के कारण आपाततः सरस मालूम पडनेवाली लेकिन वास्तव में
तो नीरस यहाँ स्थित स्त्रियाँ अतिदूरवर्तिनी यमपुरी में भीषण रूप से धधक रहीं नरकाग्नियों की उत्तम
लकड़ियाँ है