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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 21, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 21, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

जन्मपल्वलमत्स्यानां चित्तकर्दमचारिणाम् । पुंसां दुर्वासनारज्जुर्नारी बडिशपिण्डिका ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

दुष्ट वासनारूपी रस्सी से वेधी हुई स्त्री धनरूपी कीचड़ में विचरनेवाले संसाररूपी छोटे तालाब के मछलीरूपी पुरुषों को फँसाने के लिए वंशी में (मछलियों का पकड़ने के कटि में) लगी हुई आटे की गोली है। अर्थात्‌ जैसे मछुवे की बंसी में लगी गोली कीचड़ में इधर उधर चलनेवाली छोटे बरसाती तालाब की मछलियों को बन्धन में डालकर मरवा देती है, वैसे ही दुर्वासना से पूर्ण नारी धनलोलुप संसारी पुरुषों को बन्धन में डालकर नष्ट कर देती है