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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 21, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 21, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

मन्दुरं च तुरङ्गाणामालानमिव दन्तिनाम् । पुंसां मन्त्र इवाहीनां बन्धनं वामलोचना ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे घोड़ों के लिए अश्वशाला बन्धन है, हाथियों के लिए आलान बन्धन है ओर साँपों के लिए मन्त्र बन्धन है, वैसे ही पुरुषों के लिए नारी बन्धन है