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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 21, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 21, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

नानारसवती चित्रा भोगभूमिरियं मुने । स्त्रियमाश्रित्य संयाता परामिह हि संस्थितिम् ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

हे मुनिवर, विविध रसों से पूर्ण भोग की भूमि यह विचित्र पृथिवी स्त्रियों के ही सहारे दृढ़ स्थिति को प्राप्त हुई है, इस संसार की हेतु स्त्री ही है, यदि स्त्री न होती, तो संसार कभी का विलीन हो गया होता