Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 22, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
जरामार्जारिका भुङ्क्ते यौवनाखुं तथोद्धता ।
परमुल्लासमायाति शरीरामिषगर्धिनी ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले वृद्धावस्थारूपी
बिल्ली योवनरूपी चूहे को खाती है, फिर उद्धत होकर उसे शरीर का मांस खाने की इच्छा हो जाती है,
तब तो उसकी उद्दण्डता का ठिकाना नहीं रहता