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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, Verse 33

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 22, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 33

संस्कृत श्लोक

दण्डतृतीयपादेन प्रस्खलन्ती मुहुर्मुहुः । कासाधोवायुमुरजा जरा योषित्प्रनृत्यति ॥ ३३ ॥

हिन्दी अर्थ

लाठीरूपी तीसरे पैरसे युक्त, बारबार लड़खड़ा रही तथा खाँसी और अधोवायुरूपी मुरजसे (पखावज से) युक्त वृद्धावस्थारूपी स्त्री नाच कर रही है