Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, Verse 38

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 22, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

किं तेन दुर्जीवितदुर्ग्रहेण जरागतेनापि हि जीव्यते यत् । जराजगत्यामजिता जनानां सर्वैषणास्तात तिरस्करोति ॥ ३८ ॥

हिन्दी अर्थ

अपनी किसी इच्छा को पूर्ण नहीं कर सकता, इसलिए दुःखप्रद दुष्ट जीवन की दुराग्रहपूर्वक इच्छा करना निष्फल ही है, यह भाव हे