Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 22, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
अनायासकदर्थिन्या गृहीते जरसा जने ।
पलाय्य गच्छति प्रज्ञा सपत्न्येवाहताङ्गना ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
अनायास दीनता को प्राप्त करानेवाली वृद्धावस्था जव
मनुष्य को पकड़ती है तब सौत से तिरस्कृत (पिटी गई) स्त्री के समान बुद्धि भागकर करीं अन्यत्र चली
जाती है