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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 22, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

शिथिलादीर्णसर्वाङ्गं जराजीर्णकलेवरम् । समं पश्यन्ति कामिन्यः पुरुषं करभं यथा ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

जिनके सब अंग शिथिल और छिन्न-भिन्न हो गये हैं, और वृद्धावस्था से शरीर जर्जरित हो गया है, ऐसे सभी पुरुषों को स्त्रियाँ ऊँट के समान समझती है