Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 23, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
प्रेरयँल्लीलयार्केन्दू क्रीडतीव नभस्तले ।
निक्षिप्तलीलायुगलो निजे बाल इवाङ्गणे ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे बालक अपने आँगनमें खेलके गेंदों
को बारबार उछालता है, वैसे ही यह क्रूरतम काल खेल के (मन बहलाव के ) लिए सूर्य और चन्द्रमाको
आदेश देकर आकाश में मानों खेलता है