Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 23, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
सर्वभूतास्थिमालाभिरापादवलिताकृतिः ।
विलसत्येव कल्पान्ते कालः कलितकल्पनः ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रलयकाल में यह काल सब प्राणियों को नष्टकर और
अपने शरीर को उनकी (सब प्राणियोंकी) हड्डियों की मालाओं से पैर तक ढाँककर खूब शोभित होता
है