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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 23, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

महाकल्पाभिधानेभ्यो वृक्षेभ्यः परिशातयन् । देवासुरगणान्पक्वान्फलभारानिव स्थितः ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

यह काल महाकल्परूपी वृक्षों से देवता, मनुष्य और राक्षसरूपी पके हुए फलों को गिरा रहा हे