Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 23, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
कालोऽयं भूतमशकघुंघुमानां प्रपातिनाम् ।
ब्रह्माण्डोदुम्बरौघानां बृहत्पादपतां गतः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
यह काल प्राणिरूपी बहुत छोटे-छोटे मच्छरों से धुम्, धुम् ऐसा शब्द कर रहे और शीघ्र
गिरनेवाले ब्रह्माण्डरूपी गूलर के फलों का बड़ा भारी वृक्ष है अर्थात् जैसे छोटे छोटे मच्छरों से गूँज रहे
शीघ्र गिरनेवाले गूलर के फल गूलर के पेड में होते हैं, वैसे ही प्राणियों के शब्दों से गूँज रहे और शीघ्र
गिरने वाले ब्रह्माण्डरूपी फलों का आश्रयभूत वृक्ष है, वैसे ही उक्त ब्रह्माण्डों का उत्पादक यह काल है,
यह भाव हे