Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 23, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
अनन्तापारपर्यन्तबद्धपीठं निजं वपुः ।
महाशैलवदुत्तुङ्गमवलम्ब्य व्यवस्थितः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे महापर्वत (हिमालय) पृथिवीमें पूर्व ओर उत्तर की सीमा से शून्य प्रदेश में
स्थित अपने शरीर का अवलम्बन करके खड़ा है वैसे ही यह काल भी अपरिच्छिन्न, आदि-अन्तरहित
ब्रह्म मेँ प्रतिष्ठित अपने स्वरूप का अवलम्बन करके स्थित है