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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 23, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

इहापि विद्यते येषां पेलवा सुखभावना । आखुस्तन्तुमिवाशेषं कालस्तामपि कृन्तति ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार के अवस्तुभूत संसार में जिनको क्षुद्र सुख की आशा होती है, उनकी उस आशा को काल, जैसे तृण के सिरे से कुएँ में लटक रहे मकड़ी के जाले को चूहा पूर्णतया काट देता है वैसे ही, निःशेषरूप से काट देता है