Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 23, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
संचारयन्क्रियाङ्गुल्या कोणकेष्वर्कदीपिकाम् ।
जगत्सद्मनि कार्पण्यात्क्व किमस्तीति वीक्षते ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
लोभी होने के कारण ही कार्यरूपी उंगली से
दिशाओं के कोनों मे सूर्यरूपी दीपक ले जाता हुआ यह काल जगत्रूपी घर में कहाँ पर क्या है ? यह
देखता हे