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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 23, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

युगवत्सरकल्पाख्यैः किंचित्प्रकटतां गतः । रूपैरलक्ष्यरूपात्मा सर्वमाक्रम्य तिष्ठति ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

युग, वर्ण ओर कल्प नामक क्रियोपाधिक (क्रिया द्वारा प्राप्त) रूपों से काल अंशतः ही प्रकट है, उसका वास्तविक रूप कोई नहीं देख सकता। वह संसार की सम्पूर्णं वस्तुओं को अपने वश में करके बैठा है