Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, Verses 8–9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 23, verses 8–9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 8,9
संस्कृत श्लोक
ये रम्या ये शुभारम्भाः सुमेरुगुरवोऽपि ये ।
कालेन विनिगीर्णास्ते गरुडेनेव पन्नगाः ॥ ८ ॥
निर्दयः कठिनः क्रूरः कर्कशः कृपणोऽधमः ।
न तदस्ति यदद्यापि न कालो निगिरत्ययम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे गरुड़ साँपों को निगल जाता है, वैसे ही काल भी जो अनुपम
रूप से सम्पन्न थे, जो पुण्यात्मा थे और जो सुमेरु पर्वत के समान गौरवान्वित थे, उन्हें हड़प कर गया ।
यह काल बड़ा निर्दय, पत्थर के समान कठोर, बाघ आदि के समान क्रूर आरेके तुल्य कर्कश, कृपण
और अधम है। आज तक ऐसी कोई वस्तु नहीं देखी गई, जिसे इस काल ने अपने गाल में न समा लिया
हो