Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 24, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 24, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । अस्योड्डामरलीलस्य दूरास्तसकलापदः । संसारे राजपुत्रस्य कालस्याकलितौजसः ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : मुनिश्रेष्ठ, यह काल राजकुमार (४६) के अनुरूप हे । संसार में इसकी लीलाएँ बड़ी विकट हे, इसके समीप एक भी आपत्ति नहीं फटक सकती ओर इसका पराक्रम विचार शक्ति के बाहर हे । इस सर्ग में उक्त काल के ही चरित्र का वर्णन किया जाता हे

सर्ग सन्दर्भ

तेईसवाँ सर्ग समाप्त चोबीसवाँ सर्ग मृगया में कौतूहल करनेवाले राजकुमार के रूपक से अपनी प्रियतमा कालरात्रि से युक्त काल का वर्णन ।