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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 24, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 24, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

अलाबुवीणामधुरः शरद्व्योमलसच्छविः । देवः किल महाकालो लीलाकोकिलबालकः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माण्डों की माला को धारण करने के कारण तुम्बों से बनाई गई वीणा के समान सुन्दर रूप ओर ध्वनि से युक्त (८) ओर शरद्‌ ऋतु के आकाश के तुल्य स्वच्छ नीली कान्तिवाला संहार भैरव इसकी क्रीडा के लिए कोकिल का बच्चा बनाया गया है