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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 24, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 24, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

अजस्रस्फूर्जिताकारो वान्तदुःखशरावलिः । अभावनामकोदण्डः परिस्फुरति सर्वतः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

सदा टंकार शब्द करनेवाला और लगातार दुःखरूपी बाणों को उगलनेवाला उसका संहार नाम का धनुष चारों ओर चमचमा रहा है