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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 25, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 25, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच अत्रैव दुर्विलासानां चूडमणिरिहापरः । करोत्यत्तीति लोकेऽस्मिन्दैवं कालश्च कथ्यते ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार महाकाल का राजपुत्र के रूपक द्वारा वर्णन कर उसके उपाधिभूत कर्मरूप काल का, उसके मनोविनोद के लिए, दो प्रकार के नर्तकरूप से कल्पना कर वर्णन करते हैं। श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : मुनिवर, इस संसार में दुश्चरित्रों के शिरोमणि पूर्वोक्त महाकाल से अन्य एक दूसरा काल है, अन्य काल होने पर भी यह पूर्वोक्तकाल का अवस्थाभेद है, उसका यहाँ पर वर्णन किया जाता है । वह इस लोक में प्राणियों की सृष्टि और संहार करता है, लोग उसे देव (भाग्य) और काल भी कहते हैं

सर्ग सन्दर्भ

चौबीसवाँ सर्ग समाप्त पचीसवाँ सर्ग कर्म और कर्मफलरूप दूसरे काल के अद्भुत नृत्यों का वर्णन ।