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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 3, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 3, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

अज्ञानसुघनाकारा घनाहंकारशालिनी । पुनर्जन्मकरी प्रोक्ता मलिना वासना बुधैः ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

मलिन वासना का लक्षण कहते हैं। वासना बीजों के अंकुरित होने में अज्ञान ही सुक्षत्र हे । अज्ञानरूप सुक्षत्र मेँ जिसका कलेवर खूब विशाल हुआ है अर्थात्‌ विषयों के अनुसन्धान के अभ्यास से खूब बढ़ी हुई, राग-द्वेष आदि से वृद्धि को प्राप्त होने के कारण घन (निविड) अहंकाररूप क्षत्र के स्वामी द्वारा भली भोति पाली-पोषी गई अतएव शोभित इसी पुनर्जन्मकारिणी (बार-बार जन्म करानेवाली) वासना को पण्डित लोगों ने मलिन कहा है