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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 3, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 3, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

तदेतामर्थितां पूर्वां सफलां कर्तुमर्हसि । न सोऽस्ति भुवने नाथ त्वया योऽर्थी न मानितः ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

महाराज, मेरी इस प्रथम प्रार्थना को सफल (पूर्ण) करने की कृपा कीजिये इस संसार में कोई ऐसा नहीं है, जो प्रार्थी होकर आपके पास आया हो ओर उसकी अभिलाषा आपने पूर्ण न की हो