Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 3, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 3, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
तीर्थानि देवसद्मानि वनान्यायतनानि च ।
द्रष्टुमुत्कण्ठितं तात ममेदं नाथ मानसम् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : पिताजी ! तीर्थ, देवमन्दिर,
वन और आश्रमों के दर्शन के लिए मेरा मन अत्यन्त उत्कण्ठित हो रहा है