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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 3, Verse 42

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 3, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 42

संस्कृत श्लोक

अमरकिन्नरमानवमानितः समवलोक्य महीमखिलामिमाम् । उपययौ स्वगृहं रघुनन्दनो विहृतदिक् शिवलोकमिवेश्वरः ॥ ४२ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे सम्पूर्ण दिशाओं में विहार कर श्रीशिवजी शिवलोक में (केलास में) जाते हैं, वैसे ही तत्‌ तत्‌ स्थानों में स्थितदेवता, किन्नर ओर मनुष्यों द्वारा सत्कृत श्रीरामचन्द्रजी इस सम्पूर्ण भूमण्डलको (जम्बूद्वीपरूप पृथिवी को) भली भोति देखकर अपने घर अयोध्या लौट आये