Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 4, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 4, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
बभूवाथ दिनान्यष्टौ रामागमन उत्सवः ।
सुखं मत्तजनोन्मुक्तकलकोलाहलाकुलः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्र के शुभागमन के उपलक्ष में आठ दिन तक बराबर आनन्दपूर्वक उत्सव होता
रहा । उक्त उत्सव हर्ष से खूब प्रसन्न लोगों द्वारा किये गये गम्भीर कोलाहल से पूर्ण रहा