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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 4, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 4, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

उवास स सुखं गेहे ततः प्रभृति राघवः । वर्णयन्विविधाकारान्देशाचारानितस्ततः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

तवसे श्रीरामचन्द्रजी भाँति-भाँति के देशाचारों का इधर उधर वर्णन करते हुए घर में ही सुखपूर्वक रहे