Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 6, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 6, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
पदातिरेव सहसा राज्ञां वृन्देन मालितः ।
वसिष्ठवामदेवाभ्यां सह सामन्तसंस्तुतः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
अनेक राजाओं द्वारा परिवृत्त वसिष्ठ
और वामदेवजी के साथ महाराज पैदल ही जहाँ पर विश्वामित्रजी थे, वहाँ को चल दिये । उन्होने
ड्योढ़ी पर खड़े हुए मुनिश्रेष्ठ विश्वामित्रजी के दर्शन किये