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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 6, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 6, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

ततो वसिष्ठप्रमुखाः सर्व एव द्विजातयः । स्वागतादिक्रमेणैनं पूजयामासुरादृताः ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर वसिष्ठ आदि सभी ब्राह्मणों ने स्वागत आदि के क्रम से आदरपूर्वक उनकी पूजा की